उत्तर प्रदेश के किसानों को आमदनी का एक नया जरिया प्रदान करने और प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहन देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसी क्रम में सरकार की ओर से किसानों की बंजर और बेकार पड़ी जमीनों पर सोलर प्लांट लगाकर किसानों के लिए आय का एक नया जरिया शुरू करने का बीड़ा उठाया गया है.
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने कुसुम योजना के अंतर्गत की शुरुआत
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत प्रदेश में 6 निजी डेवलपर के साथ 7 मेगा वाट सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट किया है. इस एग्रीमेंट के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में निजी कंपनियां किसानों की भूमि पर सोलर प्लांट लगाएगी, सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली सरकार द्वारा खरीदी जाएगी तथा किसानों को उनकी भूमि के लिए एक निश्चित किराए का भुगतान किया जाएगा.इसके साथ ही यदि कोई किसान स्वयं सोलर पावर प्लांट लगाने में सक्षम है और वह इसके लिए निवेश कर सकता है तो वह अपनी जमीन पर स्वयं सोलर प्लांट लगाकर सरकार को बिजली भेज सकता है.
उत्तर प्रदेश में कहां लगेंगे सोलर प्लांट
कुसुम योजना के अंतर्गत सरकार देती है 90 फ़ीसदी तक अनुदान
ज्ञातव्य हो कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को सोलर पंप के लिए सरकार द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार का कुल मिलाकर अधिकतम 90 फ़ीसदी तक का अनुदान प्रदान किया जाता है, महज 10 फ़ीसदी की लागत किसानों को लगानी होती है. ऐसे में यह योजना किसानों के बीच काफी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
बंजर जमीनों पर सोलर प्लांट कैसे लगाएं
ऐसे में यदि आपके पास भी कोई बंजर जमीन उपलब्ध है तो वह सोलर प्लांट लगाने के लिए अपना प्रस्ताव यूपी नेडा अथवा पावर कारपोरेशन के माध्यम से सरकार को दे सकते हैं. इसके साथ ही यदि आप अपनी जमीन को सोलर प्लांट लगाने के लिए किराए पर देना चाहते हैं, तो उसके लिए भी यूपी नेडा के पास अपना प्रस्ताव जमा किया जा सकता है.
सोलर प्लांट के लिए कितनी जगह की आवश्यकता है
कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर प्लांट की स्थापना के लिए प्रति मेगावाट 1 एकड़ यानी 5 बीघा जमीन की आवश्यकता पड़ती है. इस जमीन में सोलर प्लांट के साथ-साथ अन्य सहायक उपकरण, कार्यालय आदि की स्थापना भी की जाती है, ताकि सोलर प्लांट का सुचारू रूप से संचालन हो सके.
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